टीईटी (TET) से किसी को भी पूरी छूट देने की कोई योजना नहीं है।
केंद्र सरकार ने संसद में यह बात साफ कर दी है।
🔑 मुख्य बातें आसान भाषा में
1️⃣ TET अनिवार्य रहेगा
TET शिक्षक बनने की न्यूनतम और जरूरी योग्यता है
इसे हटाया नहीं जाएगा और न ही सभी को सामूहिक छूट मिलेगी
2️⃣ 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी पूरी छूट नहीं
2011 से पहले नियुक्त शिक्षक TET से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं
सरकार ने कहा है कि कोई विशेष राहत पैकेज नहीं दिया जाएगा
3️⃣ सेवा अवधि के आधार पर नियम
(बहुत जरूरी पॉइंट 👇)
🟢 जिन शिक्षकों की 5 साल से ज़्यादा सेवा हो चुकी है
उन्हें नियुक्ति की तिथि से 2 साल के अंदर TET पास करना जरूरी
🟡 जिनकी 5 साल से कम सेवा है
वे बिना TET पास किए रिटायरमेंट तक काम तो कर सकते हैं
❌ लेकिन बिना TET प्रमोशन / पदोन्नति नहीं मिलेगी
4️⃣ कितने शिक्षक प्रभावित
देश में लगभग 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं जो TET नहीं करने से प्रभावित हो रहे हैं
5️⃣ सुप्रीम कोर्ट का हवाला
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार
TET को हटाना या पूरी छूट देना संभव नहीं है
❗ शिक्षकों की चिंता
शिक्षक संगठनों का कहना है:
शिक्षक वर्षों से सेवा दे चुके हैं
उम्र, पारिवारिक और स्वास्थ्य कारणों से परीक्षा देना कठिन है
लेकिन फिलहाल सरकार का रुख सख्त है
🧠 सीधा निष्कर्ष (Bottom Line)
👉 TET खत्म नहीं होगा
👉 पूरी छूट की कोई योजना नहीं
👉 कुछ मामलों में समय/शर्तों के साथ राहत हो सकती है, लेकिन अनिवार्यता बनी रहेगी
🗞️ टीईटी अनिवार्यता से छूट की कोई योजना नहीं
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर फैली अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने कहा है कि टीईटी से छूट देने की कोई योजना नहीं है और यह शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। संसद में दिए गए लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जा सकता। इसके चलते प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। सरकार के अनुसार, जिन शिक्षकों की पाँच वर्ष से अधिक सेवा अवधि पूरी हो चुकी है, उन्हें नियुक्ति की तिथि से दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। वहीं जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पाँच वर्ष से कम है, वे बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक कार्यरत रह सकते हैं, लेकिन पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि देशभर में लगभग 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी अनिवार्यता से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि टीईटी से सामूहिक छूट देना कानूनी रूप से संभव नहीं है।
इस बीच शिक्षक संगठनों ने टीईटी अनिवार्यता पर आपत्ति जताते हुए उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों से परीक्षा में कठिनाई का हवाला दिया है, लेकिन फिलहाल सरकार ने किसी तरह की अतिरिक्त राहत देने से इनकार किया है।
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